Jan 22, 2026
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पढ़ाई का बदलेगा ढांचा, हर कक्षा में तय संख्या में बैठेंगे बच्चे

नर्सरी से 12वीं कक्षा तक पढ़ाई का बदलेगा ढांचा, हर कक्षा में तय संख्या में बैठेंगे बच्चे

HP Govt CBSE Schools:  The structure of education from nursery to 12th grade will change, with a fixed number

हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई पैटर्न पर संचालित 130 सरकारी स्कूलों में शिक्षक-विद्यार्थी अनुपात को लेकर कोई ढिलाई नहीं चलेगी। राज्य सरकार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सीबीएसई स्कूलों में छात्र संख्या और शिक्षकों की तैनाती को लेकर सख्त मानक तय कर दिए हैं। इन नियमों के लागू होने से कक्षाओं में भीड़ घटेगी और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा। नई व्यवस्था में नर्सरी से बारहवीं तक प्रत्येक कक्षा में दो-दो सेक्शन अनिवार्य किए गए हैं।

हर सेक्शन में विद्यार्थियों की संख्या भी तय
इसके साथ ही हर सेक्शन में विद्यार्थियों की अधिकतम संख्या भी तय कर दी गई है। नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक एक सेक्शन में अधिकतम 30 विद्यार्थी, छठी से आठवीं कक्षा तक एक सेक्शन में 35 विद्यार्थी जबकि 9वीं से बारहवीं कक्षा तक एक सेक्शन में अधिकतम 40 विद्यार्थी ही पढ़ सकेंगे। सरकार का मानना है कि तय सीमा से अधिक छात्रों के कारण न केवल शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होती है, बल्कि शिक्षक भी विद्यार्थियों पर व्यक्तिगत ध्यान नहीं दे पाते। नए मानकों के अनुसार यदि किसी सीबीएसई स्कूल में लगभग 1250 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, तो वहां कम से कम 72 शिक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इसमें विषयवार शिक्षक, प्राथमिक, माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक स्तर के अध्यापक शामिल होंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि हर कक्षा और हर विषय के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध रहें। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने बताया कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप है, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को बोझमुक्त, समझ आधारित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। तय छात्र संख्या से कक्षाएं अधिक संवादात्मक होंगी और शिक्षकों को नवाचार आधारित पढ़ाने का अवसर मिलेगा।

फैसले से अभिभावकों को भी राहत
इस फैसले से अभिभावकों को भी राहत मिलेगी। कम विद्यार्थियों वाली कक्षाओं में बच्चों की प्रगति पर बेहतर निगरानी हो सकेगी और कमजोर छात्रों को अतिरिक्त सहयोग मिल पाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इन मानकों को चरणबद्ध तरीके से सभी सीबीएसई स्कूलों में लागू किया जाएगा। जहां शिक्षक या आधारभूत ढांचे की कमी है, वहां प्राथमिकता के आधार पर पद सृजन और नियुक्तियां की जाएंगी। हिमाचल में सीबीएसई स्कूलों के लिए यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन, गुणवत्ता और समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

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