हिमाचल प्रदेश में बिजली महंगी होने के आसार कम
हिमाचल प्रदेश में बिजली महंगी होने के आसार कम, इसी सप्ताह जारी होगा नया टैरिफ; जानें


हिमाचल प्रदेश में साल 2025-26 के लिए बिजली दरें इस सप्ताह जारी होंगी। राज्य विद्युत विनियामक आयोग 29 मार्च से पहले नई दरें जारी कर देगा। प्रदेश में कई श्रेणियों के उपभोक्ताओं की बिजली सब्सिडी बंद होने से इस बार दरें बढ़ने की संभावना कम है। उद्योगों को प्रति यूनिट 40 पैसे प्रति यूनिट सब्सिडी देने का नए टैरिफ में प्रावधान हो सकता है।





मुख्यमंत्री सुक्खू ने बीते दिनों बजट पेश करते हुए उद्योगों की एक रुपये बंद हुई बिजली सब्सिडी का फैसला वापस लेते हुए 40 पैसे सब्सिडी देने की घोषणा की है।
हिमाचल प्रदेश में 1 अप्रैल 2025 से नई बिजली दरें लागू होंगी। राज्य विद्युत विनियामक आयोग घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए नई दरें जारी करेगा।
प्रदेश में क्लास वन और टू स्तर के अधिकारियों की सब्सिडी बंद करने के फैसले से इस साल प्रदेश में घरेलू बिजली दरें बढ़ने के आसार कम हैं। व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर दूध और पर्यावरण सेस कुछ माह पहले ही लगाया गया है। ऐसे में इन उपभोक्ताओं के लिए नई दरें बढ़ेंगी या नहीं, इस पर संशय है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि एक जनवरी 2025 से क्लास वन और टू स्तर के अधिकारियों की बिजली सब्सिडी बंद करने के फैसले के बाद सरकार ने दरों में बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला लिया है। सरकार ने स्वेच्छा के आधार पर भी बिजली सब्सिडी छोड़ने की लोगों से अपील की है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्वयं अपने पांच बिजली मीटरों पर मिलने वाली सब्सिडी छोड़कर इसकी शुरुआत की है। इसी कड़ी में बिजली दरों को नहीं बढ़ाने का आग्रह करते हुए बिजली बोर्ड ने बीते दिनों ही राज्य विद्युत विनियामक आयोग में रिव्यू याचिका दायर की है।
इससे पहले बोर्ड ने करीब 300 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देते हुए 70 पैसे प्रति यूनिट तक बिजली दरों में बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव आयोग को सौंपा था। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने अप्रैल 2025 से बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं करने को कहा है। बिजली सब्सिडी बंद होने से महंगी बिजली का बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े, इसके लिए मुख्यमंत्री ने यह फैसला लिया है।
सब्सिडी बंद होने के बाद उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट एक से साढ़े तीन रुपये तक महंगी बिजली मिल रही है। इसके चलते ही सरकार दरों में और बढ़ोतरी नहीं चाह रही है।