उपभोक्ता से होम लोन की किस्तें न ले राज्य कोआपरेटिव बैंक
आयोग ने लोन बंद करने तथा शिकायतकर्ता को मुआवजा और न्यायालयी शुल्क देने का सुनाया फरमान
देशआदेश
होम लोन की सभी किस्तें भरने के बावजूद 5.34 लाख रुपये शेष भरने की मांग करने वाले राज्य सरकारी बैंक को ग्राहक का ऋण बंद करना होगा।
इसके अलावा अब बैंक ग्राहक से कोई भी किस्त नहीं ले सकेगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा, सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की खंडपीठ ने दिए हैं।

जानकारी के अनुसार गोपाल सेन नेगी निवासी गांव लिप्पा तहसील मूरंग जिला किन्नौर ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उन्होंने राज्य कोआपरेटिव बैंक शिमला मुख्यालय की शाखा रिकांगपिओ से 30 जून, 2005 को नौ फीसदी ब्याज प्रति वर्ष की दर से चार लाख रुपये का लोन लिया था।
दिसंबर, 2006 से उन्होंने लोन की किस्तें अपनी सैलरी से देनी शुरू कीं। मई, 2020 तक उन्होंने 18 किस्तें देकर लोन का सारा पैसा चुका दिया।
इस दौरान उन्होंने आठ लाख चार हजार रुपये बैंक को दे दिए। इसके बावजूद बैंक ने कहा कि उन्हें अभी तक पांच लाख 36 हजार रुपये ओर देने होंगे।
इसको लेकर बैंक की ओर से कई तरह के तर्क दिए गए। बैंक की कार्यप्रणाली से असंतुष्ट होकर गोपाल सैन नेगी ने जिला उपभोक्ता आयोग से इसकी शिकायत की।
आयोग ने बैंक को लोन तत्काल प्रभाव से बंद करने, ग्राहक एवं शिकायतकर्ता को 20 हजार रुपये मुआवजा और 15 हजार रुपये न्यायालयी शुल्क के रूप में देने के आदेश दिए हैं।
