Jan 26, 2026
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हिमाचल की 655 पंचायत ने एक भी आदमी को नहीं दिया मनरेगा में काम,

चौंकाने वाला खुलासा: हिमाचल की 655 पंचायत ने एक भी आदमी को नहीं दिया मनरेगा में काम,

77 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनमें मनरेगा के तहत कोई भी बजट नहीं किया गया खर्च

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हिमाचल प्रदेश की 655 ग्राम पंचायतों में दिसंबर में मनरेगा के तहत एक भी आदमी को काम नहीं दिया गया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट के अनुसार 3616 ग्राम पंचायतों में से 655 ऐसी निकलीं, जिनमें एक भी कार्यदिवस का सृजन नहीं किया गया। प्रदेश की 77 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जिनमें मनरेगा के तहत कोई भी बजट खर्च नहीं किया गया।

शिमला सबसे पीछे
मनरेगा के तहत कार्यदिवस सृजित करने में सबसे अधिक फिसड्डी ग्राम पंचायतें जिला शिमला की 149 रहीं। शिमला के बाद कांगड़ा में 89, सोलन में 86, किन्नौर में 67, मंडी में 61, सिरमौर में 53, हमीरपुर में 47, ऊना में 33, चंबा में 26, लाहौल-स्पीति में 25, बिलासपुर में 10 और कुल्लू में 9 पंचायतें रहीं। शून्य बजट खर्च करने वाली 77 ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा कांगड़ा की 15, शिमला की 13, मंडी की 12, सिरमौर में 7, सोलन, हमीरपुर में 6-6, चंबा, ऊना में 5-5, किन्नौर में 3, बिलासपुर, लाहौल स्पीति में 2-2 और कुल्लू में एक रही।

छह महीनों की तस्वीर भी कर रही यही बयां
रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह महीनों की तस्वीर भी यही बयां कर रही है कि एक हजार से ऊपर ग्राम पंचायतें मनरेगा में कार्यदिवस सृजित करने में नाकाम रही हैं। नवंबर में 750, अक्तूबर में 1,175, सितंबर में 1,015, अगस्त में भी 1,055 और जुलाई में 623 ग्राम पंचायतें इस श्रेणी में रहीं। नवंबर में 79, अक्तूबर में 84, सितंबर में 83, अगस्त में भी 82 और जुलाई में 78 ग्राम पंचायतों ने मनरेगा के तहत शून्य बजट खर्च किया।

सबसे ज्यादा पिछड़े जनजातीय जिले
जनजातीय जिला किन्नौर और लाहौल-स्पीति मनरेगा के तहत कार्यदिवस सृजित करने में सबसे ज्यादा पिछड़े हैं। किन्नौर जिले में कुल पंचायतों की संख्या 73 है और यहां पर दिसंबर में 67 पंचायतों में एक भी कार्यदिवस सृजित नहीं किया गया। इसी तरह लाहौल-स्पीति में कुल 45 ग्राम पंचायतें हैं और इनमें 25 पंचायतों में एक भी कार्यदिवस सृजित नहीं किया गया। किन्नौर में मनरेगा के दिसंबर में एक भी पैसा खर्च नहीं करने वाली ग्राम पंचायतों की संख्या 3 है, जबकि लाहौल-स्पीति में 2 है। शिमला जिला में कुल 412 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें 149 का प्रदर्शन रोजगार दिलाने में सबसे खराब रहा। हालांकि कांगड़ा में ग्राम पंचायतों की संख्या सबसे ज्यादा 815 हैं, जिनमें से 89 में एक भी कार्यदिवस सृजित नहीं किया गया।

जनजातीय क्षेत्रों में मनरेगा के तहत कार्यदिवस सृजित नहीं हो पा रहे हैं। यह बात सही है। अन्य जिलों में क्यों ऐसा है, इसका वह पता करेंगे। -अनिरुद्ध सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री

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