पर्यटन निगम के होटलों में 1 अप्रैल से महंगा मिलेगा खाना

पर्यटन निगम के होटलों में 1 अप्रैल से महंगा मिलेगा खाना

हिमाचल: पर्यटन निगम के होटलों में 1 अप्रैल से महंगा मिलेगा खाना, इतने फीसदी बढ़ेंगी दरें

Himachal: Food to Become More Expensive at Tourism Corporation Hotels Starting April 1; Rates to Rise by This

हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के होटलों में ठहरने वाले सैलानियों को अब खानपान के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा। निगम ने नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से यानी 1 अप्रैल से खाने-पीने की दरों में 15 से 20 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है।

निगम के अनुसार बढ़ती लागत और बाजार दरों में उछाल को देखते हुए यह वार्षिक संशोधन किया गया है। नई दरें लागू होने के बाद नाश्ते से लेकर लंच और डिनर तक सभी मेन्यू आइटम महंगे हो जाएंगे। इस फैसले का असर पर्यटन स्थलों धर्मशाला, मैक्लोडगंज, पालमपुर और नूरपुर सहित प्रदेश भर में स्थित निगम के होटलों में देखने को मिलेगा, जहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।

हालांकि, निगम ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल कमरे के किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह बढ़ोतरी केवल खानपान सेवाओं तक सीमित रहेगी। धर्मशाला क्षेत्र के एजीएम कैलाश ठाकुर ने बताया कि निगम हर वर्ष अप्रैल में सेवाओं की लागत और बाजार दरों की समीक्षा करता है। इसी प्रक्रिया के तहत इस बार भी दरों में संशोधन किया गया है, जो 1 अप्रैल से प्रभावी होगा।

 पंचायत चुनाव के आरक्षण रोस्टर पर संशय, सरकार हाईकोर्ट में आज रखेगी अपना पक्ष

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पंचायतों के पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन को लेकर दायर 15 याचिकाओं पर मंगलवार को भी सुनवाई होगी। ऐसे में राज्य सरकार पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर मंगलवार को जारी कर पाएगी या नहीं, इस पर अभी संशय बरकरार है। सरकार मंगलवार को कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

राज्य चुनाव आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार की ओर से 13 फरवरी के बाद पुन: गठित और नवगठित पंचायतों के सीमांकन को लेकर दिए गए प्रस्ताव को सहमति दे दी गई है। आयोग ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत 31 मार्च तक हर हाल में रोस्टर जारी करना होगा। यदि सरकार इसके बाद किसी नए प्रस्ताव के लिए संपर्क करती है, तो आयोग इसकी अनुमति नहीं दे सकता है।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने दायर 15 याचिकाओं पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए मामले की सुनवाई मंगलवार के लिए रखने की मांग की, जिसे अदालत में स्वीकार कर दिया।

अदालत ने पिछले आदेश में कहा था कि राज्य चुनाव आयोग की अनुमति के बिना जारी किए गए प्रस्तावों पर सरकार आगे नहीं बढ़ सकेगी। अदालत ने पाया कि हिमाचल प्रदेश पंचायत और नगर पालिका आदर्श चुनाव आचार संहिता, 2020 के प्रावधानों और 17 नवंबर 2025 की अधिसूचना के अनुसार, ऐसी प्रक्रियाओं के लिए चुनाव आयोग की अनुमति अनिवार्य है।

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