तबादला प्रशासन का विवेकाधिकार, कर्मचारी की मर्जी नहीं

तबादला प्रशासन का विवेकाधिकार, कर्मचारी की मर्जी नहीं

 हाईकोर्ट ने किया स्पष्ट कि एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण पाना किसी भी कर्मचारी का कानूनी अधिकार नहीं है।

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की तबादला नीति में स्पष्ट किया है कि एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण पाना किसी भी कर्मचारी का कानूनी अधिकार नहीं है। न्यायालय ने कहा कि विशेष रूप से तब, जब जिला कैडर के पदों पर नियुक्त कर्मचारी उसी जिले में सेवा देने के लिए बाध्य है।

 

 

 

 

 

 

 

 

हाईकोर्ट ने जेबीटी शिक्षक की याचिका को खारिज कर दिया। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि जब किसी व्यक्ति की नियुक्ति जिला कैडर के पद पर होती है, तो वह उसी जिले में सेवा करने के लिए बाध्य है। कोर्ट ने कहा कि तबादला करना प्रशासन का विवेकाधिकार है, न कि कर्मचारी की मर्जी। अदालत ने यह आदेश याचिकाकर्ता सोहन सिंह बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में दिया है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

याचिकाकर्ता जिला सोलन में जेबीटी शिक्षक के रूप में कार्यरत है। अदालत से गुहार लगाई थी कि उन्हें उनके गृह जिला मंडी में स्थानांतरित किया जाए।याचिकाकर्ता का तर्क था कि वह स्थानांतरण नीति के सभी मानदंडों को पूरा करता है और मंडी के स्कूलों में पद भी खाली हैं। अदालत में याचिका दायर करने से पहले याचिकाकर्ता ने शिक्षा विभाग को भी एक आवेदन दिया था। शिक्षा विभाग ने 4 अक्तूबर 2025 को उनकी इस मांग को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में इसे चुनौती दी थी।

 

 

 

 

 

 

राज्य सरकार ने याचिका का कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि सोलन जिले में जेबीटी/एचटी के कुल 1813 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 363 पद पहले से ही खाली चल रहे हैं। यदि शिक्षकों को दूसरे जिलों में जाने की अनुमति दी गई, तो सोलन जिले में शिक्षकों की भारी कमी हो जाएगी, जिसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा।

 

 

 

 

 

 

 

 

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