भांग की खेती पर शोध करने के लिए खर्च होंगे तीन करोड़
हिमाचल: भांग की खेती पर शोध करने के लिए खर्च होंगे तीन करोड़, जानें क्या है सरकार की योजना

खेतों के लिए किसानों, कंपनियों को लेने होंगे लाइसेंस
सरकार की योजना के मुताबिक भांग की खेती के लिए किसानों या कंपनियों को लाइसेंस लेने होंगे। औद्योगिक उद्देश्य के लिए भांग खुले में बोई जा सकेगी, जबकि दवाओं वाली भांग को पॉली हाउस और ग्रीन हाउस में संरक्षित तरीके से उगाया जाएगा।
सरकार की योजना के मुताबिक भांग की खेती के लिए किसानों या कंपनियों को लाइसेंस लेने होंगे। औद्योगिक उद्देश्य के लिए भांग खुले में बोई जा सकेगी, जबकि दवाओं वाली भांग को पॉली हाउस और ग्रीन हाउस में संरक्षित तरीके से उगाया जाएगा।

औद्योगिक इस्तेमाल के लिए हाइब्रिड बीजों को उगाने की व्यवस्था की जाएगी। दवाओं में उपयोग वाली भांग खुद फार्मा कंपनियां उगा सकती हैं, उनके साथ किसानों और सरकार का करार करवाया जा सकता है। कृषि और बागवानी विश्वविद्यालय भांग उगाने का शेड्यूल बनाएंगे। राज्य में भांग बीज बैंक की स्थापना की जाएगी।

कृषि विभाग के सचिव सीपाल रासू ने बताया कि दोनों विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ बैठक हुई है। दोनों विवि ने शोध करने के लिए तीन करोड़ रुपये खर्च होना का अनुमान लगाया गया है।