परिजनों के बयान दर्ज, कमरे की भी तलाश,
धर्मशाला छात्रा मौत मामला: दूसरी टीम पहुंची कॉलेज; लगे हैं गंभीर आरोप

डिग्री कॉलेज धर्मशाला की छात्रा की रैगिंग, अश्लील हरकतों और कथित मानसिक प्रताड़ना के बाद अस्पताल में हुई मौत के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। शुक्रवार को पुलिस की दो टीमें जांच में जुटी रहीं। डीएसपी निशा कुमारी के नेतृत्व में एक टीम छात्रा के घर पहुंची, जहां उसके माता-पिता के बयान दर्ज किए गए। इसके साथ ही छात्रा के कमरे, बैग और अन्य निजी सामान की भी जांच की गई। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्रा के डिप्रेशन में जाने की मूल वजह क्या थी और क्या उसने कॉलेज में हुई घटनाओं का जिक्र किसी डायरी या कॉपी में किया था। पुलिस को उम्मीद है कि घर से कोई अहम सुराग मिल सकता है।
दूसरी टीम ने डिग्री कॉलेज धर्मशाला में जांच की। पीड़िता के पिता की ओर से दी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चार छात्राओं ने उनकी बेटी के साथ रैगिंग की। आरोप है कि छात्रा को बोतल से पीटा गया, चाकू से हमला करने का प्रयास किया गया, बाल काटे गए और गला घोंटने की कोशिश भी की गई। पुलिस जांच कर रही है कि यदि कॉलेज परिसर में ऐसी घटनाएं हुई हैं तो क्या कोई प्रत्यक्ष गवाह मौजूद हैं या किसी छात्र द्वारा मोबाइल फोन से बनाई गई वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध है? इस दौरान कॉलेज के प्राचार्य, आरोपी शिक्षक, छात्राओं, अन्य विषयों के शिक्षकों और पीड़िता की सहेलियों से पूछताछ की गई।
छात्रा को प्रताड़ित करने के मामले में एक और छात्रा तथा कॉलेज के एक प्रोफेसर का नाम सामने आया है। आरोप है कि कॉलेज में कार्यरत एक सहायक आचार्य ने छात्रा के साथ दाखिला प्रक्रिया के दौरान अशिष्ट व्यवहार किया था। इसके अलावा एक अन्य छात्रा पर आरोप है कि उसने पीड़िता की निजी बातें अन्य छात्राओं को बताईं और उसे मानसिक रूप से नीचा दिखाया। हालांकि पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में चौथी छात्रा का नाम तो शामिल है, लेकिन दूसरे प्रोफेसर का नाम अभी एफआईआर में दर्ज नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज करवाई गई शिकायत के बाद हुई प्रारंभिक जांच में कॉलेज के दो प्रोफेसरों और चार छात्राओं से पूछताछ की गई थी। फिलहाल एफआईआर में चार छात्राओं और एक प्रोफेसर समेत कुल पांच आरोपियों के नाम दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में दूसरे प्रोफेसर की भूमिका सामने आती है, तो उसका नाम भी एफआईआर में जोड़ा जा सकता है।
पुलिस ने परिजनों से मृतका के उपचार से संबंधित विभिन्न अस्पतालों की रिपोर्ट मांगी हैं। इसमें एक्सरे, सीटी स्कैन, ब्लड सैंपल समेत अन्य रिपोर्ट्स जांच का आधार बनेंगी। पुलिस यह जानना चाहती है कि डिप्रेशन के अलावा छात्रा को कोई अन्य बीमारी तो नहीं थी, जो मौत का मूल कारण बनी हो। क्योंकि मृतक छात्रा का पोस्टमार्टम नहीं हुआ है। बिना पोस्टमार्टम ही छात्रा का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अगर पोस्टमार्टम हुआ होता तो मामले को सुलझाने में काफी मदद मिल सकती थी। फोरेंसिक साइंस विभाग में पीड़ित छात्रा, आरोपी चारों छात्राओं और प्राध्यापक के मोबाइल फोन की जांच भी होगी।
