90 दिन में 65 हजार किशोरियों को लगेगी एचपीवी वैक्सीन, मिलेगा सुरक्षा कवच

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए आईजीएमसी के अटल सभागार मे राज्य स्तरीय एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान में प्रदेश की 14 वर्ष की आयु की 65 हजार बालिकाओं को आगामी 90 दिनों में टीके लगाए जाएंगे। सुक्खू और स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल की मौजूदगी में ताराहाल स्कूल की छात्रा नंदिनी कंवर को पहला टीका लगाया गया।

मुख्यमंत्री ने अभिभावकों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य कर्मियों से कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की। कहा कि टीकाकरण को अभिभावकों से सहमति लेने के लिए एक जानकारी प्रपत्र तैयार किया जाए। नाॅर्थ ईस्ट के बाद हिमाचल सर्वाइकल कैंसर के मामलों में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने प्रदेश में कैंसर के बढ़ रहे मामलों पर चिंता व्यक्त की और कहा कि प्रदेश सरकार इस बीमारी से लड़ने को लेकर विशेष घ्यान दे रही है।
कैंसर बीमारी का उपचार संभव है, यदि समय पर जांच और पहचान कर उपचार शुरू हो। प्रदेश रकार 300 करोड़ रुपये की लागत से हमीरपुर में स्टेट ऑफ द आर्ट कैंसर अस्पताल बनाने जा रही है। आठ माह में आईजीएमसी सहित सभी मेडिकल कॉलेज विश्वस्तरीय टैक्नोलॉजी और उपकरणों से लैस होंगे। तीन साल में सभी जोनल अस्पतालों, आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों, पीएचसी, सीएचसी में भी एम्स की तर्ज पर आधुनिक तकनीक से उपचार की सुविधा उपलब्ध होगी। सरकार हाई-एंड मशीनें और उपकरण लगाने के लिए 3000 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। सुक्खू ने कहा कि सरकार हेल्थ टूरिज्म को विकसित करेगी।
शिक्षा क्षेत्र में आने वाले समय में बड़े बदलाव होंगे। स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डाॅ. धनी राम शांडिल ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर से बेटियों को सुरक्षित बचाने को एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया है। इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा और ये टीके बच्चियों को निशुल्क लगाए जाएंगे। इस दौरान विधायक हरीश जनारथा एवं सुरेश कुमार, सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा राकेश शर्मा, मिशन निदेशक एनएचएम प्रदीप ठाकुर, आईजीएमसी की प्राचार्य डाॅ. सीता ठाकुर, एमएस डाॅ. राहुल राव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी जिला शिमला डॉ. यशपाल रांटा उपस्थित थे।

10 मार्च को आईजीएमसी में शुरू होगी रोबोटिक सर्जरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के पांचों मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी शुरू की जा रही है। इसकी शुरुआत चमियाना और टांडा से की गई, जहां सौ फीसदी मरीज ठीक हुए। अब दस मार्च को आईजीएमसी में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत की जा रही है।

मशीनों के रखरखाव के लिए कुछ फीस देनी पड़ेगी
उन्होंने रोबोटिक सर्जरी की बढ़ाई गई फीस पर कहा कि निजी अस्पतालों में उनकी रोबोटिक सर्जरी हुई है। निजी अस्पतालों में लाखों खर्च होते है। कहा कि मशीनों के रखरखाव के खर्च पूरे करने को कुछ फीस देनी पड़ेगी, जिससे सुविधा जारी रहे। बार-बार इलाज करवाने से अच्छा है, एक बार इलाज हो जाए। स्पेशल वार्ड लेने वाला रोबोटिक सर्जरी को 50 हजार दे सकता है।
