Jun 18, 2024
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हिमाचल से एनओसी नहीं मिलने पर सिंचाई विभाग ने अब सीडब्ल्यूसी को भेजी रिपोर्ट

 हिमाचल से एनओसी नहीं मिलने पर सिंचाई विभाग ने अब सीडब्ल्यूसी को भेजी रिपोर्ट

After not getting NOC from Himachal, Irrigation Department now sent report to CWC
यमुनानगर। प्रतापनगर के हथिनीकुंड बैराज से साढ़े चार किमी. हिमाचल की तरफ यमुना नदी के ऊपर बनने वाले डैम के लिए हिमाचल से एनओसी नहीं मिल सकी है।
पिछले करीब तीन साल में कई रिमांइडर भेजने के बाद भी हिमाचल सरकार की ओर से इसमें रुचि नहीं दिखाई गई। ऐसे में अब सिंचाई विभाग की ओर से इसकी विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली सीडब्ल्यूसी (सेंटर वाटर कमिश्नर) को समिट कर दिया गया है।
साथ ही अब डैम की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार की जा रही है। उम्मीद है कि सीडब्ल्यूसी के हस्तक्षेप से जल्द ही इसका हल निकल सकेगा और डैम का कार्य शुरू हो सकेगा।

हथिनीकुंड बैराज से हिमाचल की सीमा तक बनने वाला डैम हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका छह हजार करोड़ की लागत से निर्माण होना है। दरअसल, यह डैम हरियाणा की सीमा में ही बनना है, किंतु रिजर्व वायर का कुछ हिस्सा हिमाचल के पांवटा साहिब तक जाएगा, ऐसे में हिमाचल से पर्यावरण मंजूरी (एनओसी) जरूरी है, लेकिन हिमाचल सरकार की ओर से इसमें रुचि नहीं दिखाई जा रही है। ऐसे में अब हरियाणा सिंचाई विभाग की ओर से इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली सीडब्ल्यूसी (सेंटर वाटर कमिश्नर) को भेजा गया है।

उधर, सिंचाई विभाग के अनुसार अभी इस परियोजना का बजट छह हजार करोड़ है जो आने वाले दिनों में सात हजार करोड़ तक पहुंच जाएगा। चूंकि परियोजना साल 2021 की है, ऐसे में इन तीन सालों में डैम के निर्माण की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है।

250 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन, कम होगा बाढ़ का खतरा
यमुना नदी पर बनने वाले इस डैम से जहां बाढ़ का खतरा कम हो जाएगा, वहीं इससे 250 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा। वहीं बांध के पानी से सूखे की स्थिति में सवा लाख एकड़ भूमि की सिंचाई भी हो सकेगी।

परियोजना के मुताबिक, 14 किमी लंबा जलाशय होगा और यह करीब 5400 एकड़ भूमि पर बनेगा। इसके निर्माण में एनएच 73 का 11 किमी लंबा हिस्सा व नौ गांव दायरे में आ सकते हैं। इनमें हरियाणा के चार व हिमाचल के पांच गांव शामिल बताये जा रहे हैं।
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हरियाणा सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिससे चार राज्यों को लाभ होगा। हिमाचल की तरफ से पर्यावरण मंजूरी नहीं मिलने पर हमने इसकी रिपोर्ट सीडब्ल्यूसी को समिट करा दी है। आगामी प्रक्रिया के तहत अब डीपीआर बनेगी। वहीं हिमाचल से एनओसी के जो इश्यू हैं, वह भी हल हो जाएंगे। डैम की परियोजना छह हजार करोड़ रुपये की है जो अब बढ़कर सात हजार करोड़ की हो सकती है।

-आरएस मित्तल, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, सिंचाई विभाग यमुनानगर।

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