वोट लेने के बाद भूल गए अंबिवाला-कंडेला-अदवाड़ गांव को? पहली बारिश में ही ढह गई सड़क, सैकड़ों ग्रामीणों का संपर्क टूटा
आजादी के बाद आज भी पक्की सड़क से महरूम गांव, एंबुलेंस तक नहीं पहुंच सकती; चुनावी घोषणाओं और विकास के दावों की खुली पोल
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सरकारें बदलती रहीं, नेता बदलते रहे और चुनाव दर चुनाव ग्रामीणों से विकास के वादे होते रहे, लेकिन अंबिवाला-कंडेला-अदवाड़ गांव की बदहाली आज भी जस की तस है। भारी बारिश और भूमि कटाव के चलते नव निर्मित संपर्क मार्ग पहली ही बारिश में ढह गया है। सड़क टूटने से सैकड़ों ग्रामीणों का संपर्क प्रभावित हो गया है और छोटे-बड़े वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद हो चुकी है।
सवाल सीधा है—चुनाव के समय गांव-गांव वोट मांगने पहुंचने वाले नेता अब कहां हैं?
सड़क टूटने के बाद ग्रामीणों के पास कोई उचित वैकल्पिक मार्ग नहीं है। उन्हें डोबरी-सालवाला होकर 7 से 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। युवाओं ने अपने स्तर पर मेहनत कर दोपहिया वाहनों के लिए जो रास्ता बनाया था, वह भी बीती रात हुई बारिश में पूरी तरह बह गया। अब ग्रामीणों को मजबूरी में पैदल रास्ता तय करना पड़ रहा है।
ग्राम पंचायत कंडेला-अदवाड़ का दूसरा पंचवर्षीय कार्यकाल भी शुरू हो चुका है, लेकिन आजादी के दशकों बाद भी गांव में पक्की सड़क सुविधा नहीं पहुंची। हालात इतने बदतर हैं कि आपात स्थिति में एंबुलेंस तक गांव नहीं पहुंच सकती। ऐसे में यदि किसी ग्रामीण की तबीयत गंभीर हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी—सरकार की, विभाग की या उन नेताओं की जो चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं?
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में करीब 90 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें आज तक सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रखा गया है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि क्या उनकी समस्याएं इसलिए अनदेखी की जा रही हैं क्योंकि चुनाव के बाद उनकी आवाज सत्ता के गलियारों तक नहीं पहुंचती?
करीब दशक पूर्व तत्कालीन ऊर्जा मंत्री द्वारा गांव में सिंचाई योजना स्थापित करने और मुख्य सड़क निर्माण की घोषणाएं की गई थीं। लेकिन वर्षों बाद भी घोषणाएं फाइलों और भाषणों से आगे नहीं बढ़ पाईं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब घोषणाएं नहीं, धरातल पर काम चाहिए।
ग्रामीण हरदयाल, अमित शर्मा, सतीश, इंदर और गौरव आदि ने बताया कि इस बार की पहली ही बारिश ने सड़क खत्म हो गई। वन विभाग, विकास खंड प्रशासन, स्थानीय विधायक, जिला परिषद, बीडीसी, प्रधान और सरकार से तत्काल मार्ग बहाल करने की मांग की है।
उनका कहना है कि सड़क को अस्थायी रूप से खोलने के साथ-साथ स्थायी पक्की सड़क और एंबुलेंस मार्ग का निर्माण किया जाए।
अब ग्रामीणों का सवाल है—क्या सरकार इस बार भी केवल आश्वासन देगी, या फिर सच में अंबिवाला-कंडेला-अदवाड़ तक सड़क पहुंचाएगी? क्योंकि जनता अब चुनावी वादे नहीं, सड़क और सुविधाओं का हिसाब मांग रही है।
