दुर्गम और पहाड़ी इलाकों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के लिए कॉमर्शियल ड्रोन सेवाओं की शुरुआत

दुर्गम और पहाड़ी इलाकों तक जरूरी सेवाएं पहुंचाने के लिए कॉमर्शियल ड्रोन सेवाओं की शुरुआत

 दुर्गम गांवों तक ड्रोन से होगी आवश्यक चीजों की सप्लाई, पीपीपी मॉडल के तहत होगी शुरुआत

Drones will be used to deliver essential items to remote villages in Himachal Pradesh

हिमाचल प्रदेश का हर दुर्गम गांव जल्द ही ड्रोन सेवाओं से जुड़ेगा। राज्य सरकार प्रदेश के दुर्गम और पहाड़ी इलाकों तक सामान और जरूरी सेवाएं पहुंचाने के लिए कॉमर्शियल ड्रोन सेवाओं की शुरुआत करने जा रही है। ग्रीन हिमाचल विजन की ओर कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने हमीरपुर, मंडी और कांगड़ा में ड्रोन स्टेशन स्थापित करने का फैसला किया है। साल 2026 के मध्य तक ड्रोन सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

हिमाचल में कई गांव आज भी सड़क या पारंपरिक परिवहन सेवा से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं। ऐसे में ड्रोन आधारित परिवहन प्रणाली इन क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को सरल और तेज बना सकती है। तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि ड्रोन सेवाओं के जरिये ग्रामीण इलाकों में कृषि, डेयरी व वन उत्पादों की ढुलाई संभव होगी, जिससे किसानों और स्थानीय उद्यमियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिलेगी। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ड्रोन सेवाओं की शुरुआत हमीरपुर, मंडी और कांगड़ा से की जाएगी।

बाद में सफल परिणामों के बाद इसे पूरे प्रदेश में शुरू किया जाएगा। इसके लिए राज्य इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड ने पीपीपी मॉडल के तहत कंसल्टिंग फर्मों का चयन करना शुरू कर दिया है। मांग और बाजार विश्लेषण, स्थल और रूट सर्वेक्षण, तकनीकी एवं वाणिज्यिक मूल्यांकन, वित्तीय मॉडल और जोखिम विश्लेषण, कानूनी और नियामक फ्रेमवर्क का सुझाव देने का काम कंसल्टेंट करेंगे।

आवश्यक चीजों की सप्लाई होगी आसान
योजना के सफल होने से फल-सब्जियां और फूल जैसे उत्पाद खेतों से सीधे बाजारों तक पहुंचेंगे। प्राकृतिक आपदा और स्वास्थ्य आपात स्थिति में तुरंत सहायता और दवाएं पहुंचेंगी। दुर्गम इलाकों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच आसानी से होगी। स्थानीय युवाओं को ड्रोन संचालन, डेटा एनालिटिक्स, सर्वेक्षण और मरम्मत कार्यों में रोजगार के अवसर मिलेंगे। वहीं, आईटीआई में ड्रोन से संबंधित पढ़ाई कर रहे युवाओं को प्रदेश में हो रही इस नई शुरूआत से लाभ प्राप्त होगा।

ड्रोन तकनीक का उपयोग अब केवल रक्षा या सर्वेक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। हिमाचल में इसे नागरिक जीवन, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय व्यापार को सशक्त बनाने के लिए प्रयोग में लाया जाएगा। बोर्ड आने वाले महीनों में परियोजना का तकनीकी और आर्थिक मूल्यांकन करेगा। इसके बाद सरकार के अनुमोदन से ड्रोन कॉरिडोर और स्टेशन नेटवर्क का निर्माण शुरू किया जाएगा।
– डॉ. वसु सूद, सीजीएम, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड

एशियाई मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता में ट्रिपल जंप, लंबी कूद लगाएंगे गुरनाम बंगा: जीएस सैनी

गुरनाम सिंह बंगा का चयन एशियाई मास्टर्स एथलेटिक्स प्रतियोगिता-2025 में हुआ है, वह ट्रिपल जंप, लंबी कूद लगाएंगे।
वह 1500 मीटर दौड़ में हिस्सा लेंगे।
हिमाचल प्रदेश विंग के सचिव भीष्म सिंह चौहान ने गुरु नानक मिशन पब्लिक स्कूल प्रबंधन को गुरनाम सिंह बंगा के चयन की जानकारी दी। बंगा चेन्नई में 5 से 9 नवंबर तक होने वाली एशियन चैंपियनशिप में भारतीय टीम का हिस्सा बनेंगे।
आपको बता दें कि गुरनाम सिंह बंगा क्षेत्र के प्रतिष्ठित  गुरुनानक मिशन पब्लिक स्कूल में बतौर शारीरिक कोच कार्यरत हैं। स्कूल के निदेशक गुरजीत सिंह सैनी और प्रधानाचार्य गुरविंद्र कौर चावला ने भी गुरनाम सिंह बंगा को बधाई दी है।

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