Jun 18, 2024
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उत्तराखंड पुलिस ने कुल्हाल में गिरफ्तार किया ज्ञान गोदड़ी जा रहा जत्था

उत्तराखंड पुलिस ने कुल्हाल में गिरफ्तार किया ज्ञान गोदड़ी जा रहा जत्था

न्यूज देशआदेश

सार
आल इंडिया सिख फेडरेशन के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बब्बर के नेतृत्व में दिल्ली और पंजाब से ज्ञान गोदड़ी यात्रा चली थी। इसमें चार वाहनों में करीब 26 लोग शामिल थे। इनके आने की उत्तराखंड पुलिस को सूचना थी। पुलिस बल ने यात्रा में शामिल लोगों को यमुना नदी के साथ लगते कुल्हाल बॉर्डर पर रोक लिया।

विस्तार
उत्तराखंड के हरिद्वार ज्ञान गोदड़ी जाने के लिए निकले एक जत्थे को उत्तराखंड पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आल इंडिया सिख फेडरेशन के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बब्बर के नेतृत्व में 26 लोग पहुंचे थे। इनके वाहन उत्तराखंड के कुल्हाल बॉर्डर पर रोके गए। जत्थे में शामिल लोगों ने गिरफ्तारी दी। सभी को गिरफ्तार कर ढालीपुर के एक होटल में कई घंटे रखा गया। बाद में सभी को निजी मुचलकों पर रिहा करने के साथ लौटा दिया।

 

बताया जा रहा है कि आल इंडिया सिख फेडरेशन के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बब्बर के नेतृत्व में दिल्ली और पंजाब से ज्ञान गोदड़ी यात्रा चली थी। इसमें चार वाहनों में करीब 26 लोग शामिल थे। इनके आने की उत्तराखंड पुलिस को सूचना थी। पुलिस बल ने यात्रा में शामिल लोगों को यमुना नदी के साथ लगते कुल्हाल बॉर्डर पर रोक लिया। फेडरेशन के अध्यक्ष गुरचरण सिंह बब्बर ने कहा कि ज्ञान गोदड़ी गुरद्वारे की जमीन संगत को सौंपने की मांग करते रहे हैं।

संगत शांतिपूर्ण ढंग से हरिद्वार जाकर गुरुद्वारे की जमीन पर मत्था टेकना चाहती है, लेकिन उन्हें उत्तराखंड से बाहर रोक लिया जाता है। उप जिलाधिकारी विनोद कुमार, एसपी देहात कमलेश उपाध्याय, सीओ प्रेमनगर दीपक कुमार, कोतवाली प्रभारी रविंद्र शाह, एसओ सहसपुर विनोद राणा, एसओ कालसी अशोक राठौड़ तथा कुल्हाल पुलिस चौकी प्रभारी रजनीश सैनी मौजूद रहे।

ये रहा है विवाद

बताते हैं कि उत्तराखंड में हर की पौड़ी के पास लंढौरा हाउस भवन हुआ करता था। वर्ष 1974 में कुंभ से पूर्व घाट की विस्तारीकरण योजना में भवन व आसपास की इमारतें ढहा दी गई थीं। जिस स्थल की जत्था बात करता है, उस पर पुल बना हुआ है। पुल के नीचे एक स्काउट एंड गाइड कार्यालय भी स्थित है।

जत्थे का दावा है कि इसी स्थल पर गुरुनानक देव ने प्रवास किया था। इसके लिए उसे ज्ञान गोदड़ी के नाम से जाना जाता है। इसलिए इस भूखंड को सरकार संगत को सौंपे, जिससे वह वहां एक भव्य गुरुद्वारा बना सकें। यह जत्था ज्ञान गोदड़ी यात्रा लेकर हर वर्ष बैसाखी से एक दिन पूर्व हिमाचल के पांवटा होकर उत्तराखंड में प्रवेश करने का प्रयास करता है।