पंचायतीराज संस्थाओं की अंतिम वोटर लिस्ट जारी
राज्य निर्वाचन आयोग मंगलवार को पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव का शेड्यूल जारी कर सकता है। चुनाव की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायतीराज संस्थाओं की फाइनल मतदाता सूची जारी कर दी है। प्रदेश की पंचायतों में करीब 51 लाख मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें 85 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 50 हजार मतदाता भी शामिल हैं, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे।
इस बार बुजुर्ग मतदाताओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए जाने की भी तैयारी है। राज्य निर्वाचन आयोग मंगलवार को पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव का शेड्यूल जारी कर सकता है।
चुनाव की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेशभर में मतदान के लिए आवश्यक सामग्री, विशेषकर मतपेटियों को सुरक्षित रूप से स्ट्रांग रूम तक पहुंचा दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी व्यवस्थाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी कर ली जाएंगी।


इस बार करीब 56 हजार कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। ये कर्मचारी विभिन्न चरणों में मतदान, मतगणना और अन्य व्यवस्थाओं को संभालेंगे। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखकर 15 हजार पुलिस कर्मियों की मांग की है। चुनाव के दौरान संवेदनशील और अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा प्रबंध किए जाएंगे।
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराना उनकी प्राथमिकता है। इसके लिए सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आचार संहिता लागू होने के बाद राजनीतिक गतिविधियों पर भी नजर रखी जाएगी। प्रदेश में पंचायतीराज चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं।
संभावित उम्मीदवार अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं और मतदाताओं तक पहुंच बनाने में जुटे हैं। ऐसे में आगामी दिनों में चुनावी माहौल और गर्माने की संभावना है। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत राठौर ने बताया कि फाइनल मतदाता सूचियां जारी करने की 28 अप्रैल अंतिम तारीख तय की गई थी। जिला निर्वाचन अधिकारियों ने सूचियां जारी कर दी है।
पंचायतों में व्यक्ति एक से ज्यादा पदों पर लड़ सकते चुनाव
हिमाचल पंचायत चुनाव में व्यक्ति 1 से ज्यादा पदों पर भी चुनाव लड़ सकता है। चुनाव खत्म होने के बाद व्यक्ति को यह बताना होगा कि वह किस पद पर रहना चाहता है।
सरकारी सेवाओं से हटाया गया व्यक्ति नहीं लड़ सकता चुनाव
पंचायतों में सरकारी सेवाओं से हटाया गया व्यक्ति चुनाव लड़ने का हकदार नहीं होगा। अगर कोई व्यक्ति शिकायत करता है उक्त व्यक्ति का नामांकन रद्द माना जाएगा।
शैक्षणिक योग्यता भी नहीं
पंचायतीराज संस्थाओं में चुनाव लड़ने की शैक्षणिक योग्यता नहीं होगी। अनपढ़ व्यक्ति भी चुनाव लड़ने का हकदार होगा।
सरकारी नौकरी में तैनात कर्मचारी एजेंट बना हो तीन साल की कारावास
सरकारी नौकरी में तैनात अगर कोई कर्मचारी किसी भी उम्मीदवारों का एजेंट बनता है तो उसे तीन साल की कारावास का प्रावधान रखा गया है। सरकारी नौकरी में तैनात लोग एजेंट नहीं बन सकते हैं।
अनुदान प्राप्त व सरकारी नौकरी पर तैनात नहीं लड़ सकते हैं चुनाव
प्रदेश व केंद्र सरकार की ओर से जिन्हें मानदेय मिलता है वह पंचायतों के चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। चुनाव लड़ने के लिए उन्हें पहले नौकरी छोड़नी होगी।



