Apr 6, 2025
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महाशिवरात्रि पर सजे मंदिर, भक्तों में उत्साह

महाशिवरात्रि पर सजे मंदिर, भक्तों में उत्साह, बाजार में रही खूब रौनक

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महाशिवरात्रि पर्व को लेकर लोगों में उत्साह पूर्व संध्या से ही देखने को मिला। पर्व को लेकर मंदिरों में चल रही तैयारियां देर रात तक जारी रही। वहीं, पर्व को लेकर बाजार में भी खूब रौनक देखने को मिली। इस दौरान देर शाम तक बाजार गुलजार रहे और लोगों ने पूजन संबंधी सामग्री की खरीदारी की।

पर्व के चलते बाजारों में बेल, बेर, गन्ना, जेनेऊ, फल, फूल, इत्र इत्यादि की लोगों ने जमकर खरीदारी की।

 

अन्य वर्षों की अपेक्षा यह महाशिवरात्रि विशेष है। चूंकि इस बार महाशिवरात्रि पर महासंयोग बन रहा है। चूंकि बुधादित्य योग, त्रिग्रही योग बन रहा है। शिवरात्रि पर तीन ग्रह एक ही राशि में होंगे। यह राशि भगवान शिव की है, जिससे कारण यह संयोग दुर्लभ बन रहा है। यह संयोग करीब 50 साल बाद बन रहा है।

 

ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि इस दुर्लभ संयोग में भगवान शिव की उपासना भक्तों को मनोवांच्छित फल देगी। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध, दही, शक्कर, गन्ना, धतूरा इत्यादि चढ़ाने से सभी कष्टों का निवारण होगा। ऐसे में भक्त महाशिवरात्रि का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसे लेकर जिले के तमाम मंदिरों में तैयारियां चल रहीे हैं।

 

आज बुधवार को सुबह पांच बजे से जलाभिषेक शुरू होगा। पूरा दिन महादेव की पूजा व जलाभिषेक किया जा सकता है। महाशिवरात्रि को लेकर शहर के सभी मंदिरों में विशेष कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। वहीं, स्वयं-भू शिवलिंग व पौराणिक मंदिरों में इसे लेकर कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं।

इन मंदिरों में जलाभिषेक से पूर्ण होंगे मनोरथ

जिले में स्थित पौराणिक मंदिरों में महादेव का जलाभिषेक करने से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होंगे। इन मंदिरों का इतिहास महाभारत काल से भी पहले का बताया जाता है। इन मंदिरों में पांड़वों सहित कई ऋषि-मुनियों ने घोर तपस्या भी की है। पांवटा साहिब स्थित पातालेश्वर महादेव मंदिर में स्वयं-भू शिवलिंग स्थित है।

 

 

 

 

शिव मंदिर डोरियोंवाला, डांडेश्वर मंदिर, धौलीढांग आदि में स्वयं-भू शिवलिंग स्थित है। यहां शिवलिंग का जलाभिषक करने के लिए भक्तों की मीलों लंबी लाइन लगती है।

टोंस नदी से सट्टा सहस्त्रधारा मंदिर ग्राम पंचायत खोदरी माजरी
यहां पर जल की धाराएं बहती रहती है। मान्यता है कि यहां पर पांड़वों ने शिव आराधना की थी।
पांड़वों ने काफी समय बिताया और तपस्या की थी।

इसी तरह कलेसर स्थित कालेश्वर महादेव मठ में भी भगवान स्वयं-भू शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। यहां पर माता पार्वती व भगवान शिव के प्राचीन मंदिर व गुफा हैं। मान्यता है कि यहां पर पांड़वों ने शिव आराधना की थी।