बैंकों में जमा होगा मंदिरों का सोना-चांदी, ब्याज से बढ़ेगी आमदनी

बैंकों में जमा होगा मंदिरों का सोना-चांदी, ब्याज से बढ़ेगी आमदनी

हिमाचल प्रदेश : बैंकों में जमा होगा मंदिरों का सोना-चांदी, ब्याज से बढ़ेगी आमदनी; जानें पूरी योजना विस्तार से

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हिमाचल प्रदेश के मंदिरों में दशकों से जमा सोने का अकूत भंडार अब आमदनी का जरिया बनेगा। अरबों रुपये की कीमत के इस भंडार को अब गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत बैंकों में जमा किया जाएगा। इससे प्राप्त होने वाले ब्याज मंदिर न्यासों को मिलेगा, जिससे मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार हो सकेगा।

भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से प्रदेश के सभी मंदिर आयुक्त एवं जिला के उपायुक्तों को पत्र जारी किया गया है। पत्र में इस योजना की प्रति संलग्न कर मंदिर न्यास की बैठक में इस पर विचार कर सरकार को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के मंदिरों के कोषागारों में वर्तमान में अरबों रुपये की कीमत का सैकड़ों किलो सोना और चांदी जमा है। अब इस सोने-चांदी का शुद्धिकरण करवा मंदिर न्यास ब्याज के रूप में आमदनी में इजाफा कर सकेंगे।

प्रदेश के मंदिरों में लगभग 6 क्विंटल से अधिक सोना और 200 क्विंटल से ज्यादा चांदी मंदिरों के कोषागारों में जमा है। निर्देशों में कहा गया है कि मंदिर न्यास की बैठक में प्रस्ताव पारित कर राज्य सरकार को स्वीकृति के लिए भेजा जाए। इस योजना की कॉपी भी संलग्न की गई है और नजदीकी एसबीआई बैंक शाखा से भी इस बारे में संपर्क करने के लिए कहा गया है। बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास के पास वर्तमान में 30.45 किलो सोना और 3.68 क्विंटल चांदी उपलब्ध है।

यह रहेगी योजना
एसबीआई बैंक शिमला के महाप्रबंधक के साथ भाषा एवं संस्कृति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की इस सिलसिले में बैठक हो चुकी है। बैठक में सोने-चांदी के शुद्धिकरण और निपटान पर चर्चा हुई। इस दौरान चांदी के निपटान के लिए कोई योजना एसबीआई की ओर से नहीं बताई गई। सोने को बैंक शाखा की ओर से मंदिर न्यास के अधिकारियों की मौजूदगी में शुद्धिकरण के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद एक रसीद बैंक की ओर से जारी कर सोने का शुद्धिकरण किया जाएगा। इसके बाद शुद्ध सोने की प्रोविजनल प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा। इस आधार पर न्यास का बैंक खाता खोला जाएगा, जिसमें ब्याज की राशि मिलेगी। वहीं, जमा चांदी के निपटारे को लेकर भी कदम उठाने के लिए मंदिर न्यासों को कहा गया है।

भाषा एवं संस्कृति विभाग से इस बारे में पत्र प्राप्त हुआ है। इस सिलसिले में बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास की हालिया बैठक में प्रस्ताव पारित कर यह निर्णय लिया गया है कि यदि प्रदेश के अन्य मंदिरों में इस योजना को लागू किया जाता है, तो बाबा बालक नाथ मंदिर न्यास में सर्वसम्मति से लागू होगी। – संदीप चंदेल, मंदिर अधिकारी, बाबा बालक नाथ मंदिर ट्रस्ट

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